बच्चों में मोटापा: इसे कैसे पहचानते हैं और क्या मदद करता है?

बच्चों में मोटापा ग्रोथ चार्ट से पहचाना जाता है, जिनमें बच्चे के वज़न या BMI की तुलना उसी उम्र और लिंग के दूसरे बच्चों से की जाती है, बड़ों की BMI सीमाओं से नहीं। यह कई कारणों से होने वाली एक लंबी (क्रॉनिक) बीमारी है, और इसका सबसे भरोसेमंद इलाज एक व्यवस्थित कार्यक्रम है जिसमें पूरा परिवार शामिल होता है।

लेखक: Geert Jan Brugman, संस्थापक
आख़िरी समीक्षा: · 9 मिनट में पढ़ें

अगर आप अपने बच्चे के वज़न, बढ़त या खान-पान को लेकर चिंतित हैं, तो अपने फ़ैमिली डॉक्टर, बच्चों के डॉक्टर (पीडियाट्रिशियन) या स्कूल अथवा सामुदायिक नर्स से बात करें। यह पेज सामान्य जानकारी देता है और बच्चे की व्यक्तिगत जाँच की जगह नहीं ले सकता।

बच्चों में मोटापा कैसे तय किया जाता है?

बच्चों में मोटापा तय करने के लिए बच्चे के माप की तुलना उसी उम्र और लिंग के बच्चों के लिए बने WHO के ग्रोथ स्टैंडर्ड से की जाती है। बढ़ते बच्चों का शरीर लगातार बदलता है, इसलिए बड़ों वाली BMI श्रेणियाँ उन पर लागू नहीं होतीं।

बच्चों में ज़्यादा वज़न और मोटापे की WHO परिभाषाएँ
उम्रमापज़्यादा वज़नमोटापा
5 साल से कमलंबाई के हिसाब से वज़न (WHO चाइल्ड ग्रोथ स्टैंडर्ड)मीडियन से 2 स्टैंडर्ड डेविएशन से ज़्यादामीडियन से 3 स्टैंडर्ड डेविएशन से ज़्यादा
5 से 19 सालउम्र के हिसाब से BMI (WHO ग्रोथ रेफ़रेंस)मीडियन से 1 स्टैंडर्ड डेविएशन से ज़्यादामीडियन से 2 स्टैंडर्ड डेविएशन से ज़्यादा

कुछ देश अपने ग्रोथ चार्ट और पर्सेंटाइल (सेंटाइल) में तय सीमाएँ इस्तेमाल करते हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिका में CDC 2 से 19 साल के बच्चों में 85वें पर्सेंटाइल या उससे ऊपर के BMI को ज़्यादा वज़न और 95वें पर्सेंटाइल या उससे ऊपर को मोटापा मानता है। ब्रिटेन में NICE 5 साल की उम्र से कमर-से-क़द अनुपात भी देखता है, जिसमें 0.5 या उससे ज़्यादा का मतलब सेहत का बढ़ा हुआ जोखिम है। इन मापों के बारे में हमारा पेज बीएमआई और कमर का माप विस्तार से बताता है।

सिर्फ़ एक बार का माप अपने आप में ज़्यादा कुछ नहीं बताता। डॉक्टर देखते हैं कि समय के साथ बच्चा कैसे बढ़ रहा है, और साथ ही उसकी सेहत, विकास और मन की स्थिति पर भी ध्यान देते हैं।

बच्चों में मोटापा कितना आम है?

1990 के बाद से दुनिया भर में बच्चों का मोटापा तेज़ी से बढ़ा है। WHO के ताज़ा अनुमानों के अनुसार:

  • 5 साल से कम उम्र के 3.5 करोड़ बच्चों का वज़न ज़्यादा है
  • 5 से 19 साल के 40 करोड़ बच्चों और किशोरों का वज़न ज़्यादा है, जिनमें से 17 करोड़ मोटापे के साथ जी रहे हैं
  • 5 से 19 साल के बच्चों में मोटापे का हिस्सा 1990 के 2 प्रतिशत से बढ़कर 8 प्रतिशत हो गया है

बचपन का मोटापा अक्सर बड़े होने पर भी बना रहता है। यह टाइप 2 डायबिटीज़ और दिल की बीमारी के शुरुआती लक्षणों से जुड़ा है, और साथ ही ताने, बुलिंग, जीवन की कम गुणवत्ता और पढ़ाई में कमज़ोर नतीजों से भी।

बच्चों में मोटापा किन कारणों से होता है?

बच्चों में मोटापा जीन, शरीर की बनावट और उस माहौल के मेल से होता है जिसमें बच्चा बड़ा होता है; इसमें न बच्चे का दोष है, न सिर्फ़ माता-पिता का। इसके कारणों में शामिल हैं:

  • जीन और शरीर: कुछ बच्चों को विरासत में ज़्यादा भूख या चर्बी जमा करने की प्रवृत्ति मिलती है; कुछ दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियाँ बहुत छोटी उम्र से गंभीर मोटापा पैदा कर सकती हैं। देखें जीन और शरीर की भूमिका।
  • खाने का माहौल: सस्ते, ज़्यादा कैलोरी वाले खाने और मीठे पेय आसानी से मिलना, और बच्चों को निशाना बनाकर किया जाने वाला भारी विज्ञापन। देखें खाने का माहौल।
  • खेल-कूद और स्क्रीन: खेलने की सुरक्षित जगहें कम होना, पैदल या साइकिल से आना-जाना कम होना और ज़्यादा देर बैठे रहना।
  • नींद और तनाव: कम नींद, तनाव, मुश्किल अनुभव और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएँ।
  • शुरुआती जीवन: गर्भावस्था और शिशु अवस्था के कुछ कारक, जिनमें गर्भावस्था के दौरान माँ की सेहत भी शामिल है। WHO शिशु के स्वस्थ शुरुआती पोषण के हिस्से के रूप में, जहाँ संभव हो, स्तनपान की सलाह देता है।
  • दवाएँ और बीमारियाँ: कुछ दवाएँ और हार्मोन से जुड़ी बीमारियाँ वज़न बढ़ा सकती हैं।

बच्चों में मोटापे का इलाज कैसे होता है?

बच्चों में मोटापे का मुख्य इलाज एक व्यवस्थित कार्यक्रम है, जिसमें सेहतमंद खाना, शारीरिक गतिविधि और आदतों में बदलाव साथ-साथ चलते हैं, और माता-पिता या देखभाल करने वाले इसमें पूरी तरह शामिल रहते हैं। WHO ने अब बच्चों और किशोरों में मोटापे पर अपनी पहली वैश्विक गाइडलाइन जारी की है, जो:

  • मोटापे के साथ जी रहे बच्चों और किशोरों के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा चलाए जाने वाले, खान-पान, शारीरिक गतिविधि और आदतों में बदलाव पर आधारित व्यवस्थित कार्यक्रमों की ज़ोरदार सिफ़ारिश करती है
  • डिजिटल टूल्स को सिर्फ़ अतिरिक्त मदद के रूप में, माता-पिता या देखभाल करने वाले की निगरानी में, सही मानती है
  • 0 से 9 साल के बच्चों के लिए दवाओं, बेरियाट्रिक सर्जरी या वज़न घटाने वाले उपकरणों की सिफ़ारिश नहीं करती
  • कहती है कि 10 से 19 साल में स्वीकृत दवाओं पर तभी विचार किया जा सकता है जब निगरानी में चला जीवनशैली कार्यक्रम पर्याप्त असर न दिखाए, और गंभीर मोटापे में सख़्त शर्तों के साथ सर्जरी पर विचार हो सकता है
  • चाहती है कि चिंता और डिप्रेशन जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं पर जल्दी और मोटापे के साथ-साथ ध्यान दिया जाए

अलग-अलग देशों की गाइडलाइन अलग हैं। अमेरिका में अमेरिकन एकेडमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स (AAP) यह इंतज़ार न करने की सलाह देती है कि बच्चा बड़ा होकर अपने आप ठीक हो जाएगा, और गहन परिवार-आधारित इलाज की सिफ़ारिश करती है, आदर्श रूप से 3 से 12 महीनों में कम से कम 26 घंटे का संपर्क।

अच्छे कार्यक्रम बच्चे का साथ देते हैं और उसे सख़्त डाइट पर नहीं रखते। प्रशिक्षित विशेषज्ञों की देखरेख में व्यवस्थित इलाज से ईटिंग डिसऑर्डर होते नहीं पाए गए हैं, बल्कि इससे उनके लक्षण कम हो सकते हैं। कार्यक्रमों, दवाओं और सर्जरी की उपलब्धता और ख़र्च हर देश में अलग है।

इलाज का लक्ष्य सेहत, फ़िटनेस, मन की ख़ुशी और आत्मविश्वास बेहतर करना है। बहुत-से बढ़ते बच्चों के लिए लक्ष्य वज़न घटाना नहीं, बल्कि क़द बढ़ने के दौरान वज़न बढ़ने की रफ़्तार धीमी करना होता है।

घर पर परिवार क्या कर सकता है?

परिवार सबसे ज़्यादा मदद तब करता है जब सेहतमंद आदतें घर के हर सदस्य के लिए आम बात बन जाएँ, न कि किसी एक बच्चे को अलग किया जाए। पूरे परिवार के लिए कारगर सुझाव:

  • जब हो सके, साथ बैठकर तय समय पर खाना खाएँ, और सब्ज़ी, फल और पानी को आसान विकल्प बनाएँ।
  • मीठे पेय और स्नैक्स कभी-कभार के लिए रखें, लेकिन उन पर पूरी पाबंदी न लगाएँ और उन्हें इनाम के रूप में न दें।
  • ऐसी गतिविधियाँ ढूँढ़ें जो बच्चे को पसंद हों, और साथ में चलें-फिरें, जैसे पैदल घूमना, साइकिल चलाना या बाहर खेलना।
  • स्क्रीन टाइम की सीमा मिलकर तय करें और रात में फ़ोन-टैबलेट बेडरूम से बाहर रखें।
  • सोने का समय तय रखें ताकि बच्चे की नींद पूरी हो।

बच्चे से वज़न के बारे में बिना शर्मिंदा किए कैसे बात करें?

वज़न, साइज़ या रूप-रंग की बजाय सेहत, आदतों और अच्छा महसूस करने की बात करें। 2,000 से ज़्यादा किशोरों पर हुए एक शोध में पाया गया कि वज़न पर बातचीत का संबंध ज़्यादा डाइटिंग और वज़न घटाने के अस्वस्थ तरीक़ों से था, जबकि सेहतमंद खाने पर बातचीत का ऐसा कोई संबंध नहीं था।

  • न बच्चे को दोष दें, न ख़ुद को, और डाइट या मोटा जैसे शब्दों से बचें।
  • ऐसी ख़ूबियों की तारीफ़ करें जिनका रूप-रंग से कोई लेना-देना नहीं, जैसे दयालुता, मेहनत या अच्छा दोस्त होना।
  • अगर बच्चा ख़ुद अपने वज़न की बात छेड़े, तो शांति और प्यार से सुनें, और पूछें कि वह क्या सोचता और महसूस करता है।
  • परिवार का एक नियम बनाएँ: किसी के शरीर का मज़ाक़ नहीं उड़ाया जाएगा, और दूसरों के डील-डौल पर की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताई जाएगी।
  • खाने और अपने शरीर के साथ ख़ुद एक सेहतमंद रिश्ता रखकर मिसाल बनें।
  • अगर बच्चे को वज़न को लेकर बुली किया जाता है, तो स्कूल के साथ मिलकर बुलिंग से निपटें; इसकी वजह से उसका खाना न बदलें।

हमारे पेज वज़न को लेकर भेदभाव और अपने प्रियजन का साथ देना में और सुझाव हैं।

डॉक्टर को कब दिखाएँ?

अगर आपको बच्चे के वज़न या बढ़त की चिंता है, या वज़न तेज़ी से बढ़ रहा है, तो डॉक्टर को दिखाएँ। जल्दी मदद लें अगर आपका बच्चा:

  • ज़ोर से खर्राटे लेता है, रात में साँस रुक-रुक जाती है या दिन में बहुत थका रहता है
  • कूल्हे, घुटने या टाँग में दर्द की शिकायत करता है, या लँगड़ाकर चलता है
  • गर्दन या बगल में गहरे रंग की, मख़मली त्वचा के धब्बे हैं, या उसे बहुत प्यास लगती है और बार-बार पेशाब आता है
  • उसे अक्सर सिरदर्द होता है या देखने में परेशानी होती है
  • उदास, घबराया हुआ या सबसे कटा-कटा लगता है, या उसे बुली किया जाता है
  • खाना छोड़ देता है, छिपकर खाता है, जानबूझकर उल्टी करता है या बहुत सख़्त डाइट करता है
  • बहुत छोटी उम्र में ही उसका वज़न बहुत बढ़ गया था, या उसे असामान्य भूख लगती है

डॉक्टर बच्चे की बढ़त और ब्लड प्रेशर जाँच सकते हैं, ज़रूरत हो तो ख़ून की जाँच करा सकते हैं, और किसी विशेष कार्यक्रम के लिए रेफ़र कर सकते हैं। हमारी डॉक्टर विज़िट चेकलिस्ट तैयारी में आपकी मदद कर सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या मैं बच्चे के लिए बड़ों वाला BMI कैलकुलेटर इस्तेमाल कर सकता हूँ?

नहीं। बच्चे के BMI की तुलना ग्रोथ चार्ट के ज़रिए उसी उम्र और लिंग के दूसरे बच्चों से करनी होती है। कोई स्वास्थ्यकर्मी बच्चे के माप चार्ट पर दर्ज करके समझा सकता है कि उनका क्या मतलब है।

क्या बच्चा बड़ा होकर अपने आप पतला हो जाएगा?

कुछ बच्चे हो जाते हैं, लेकिन बचपन का मोटापा अक्सर बड़े होने पर भी बना रहता है। इसलिए अमेरिकन एकेडमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स जैसी गाइडलाइन सिर्फ़ इंतज़ार करने के ख़िलाफ़ सलाह देती हैं। जल्दी मिलने वाली, सहारा देने वाली और पूरे परिवार को साथ लेने वाली मदद सबसे अच्छा काम करती है।

क्या बच्चों को वज़न घटाने की दवाएँ दी जाती हैं?

WHO 0 से 9 साल के बच्चों के लिए दवाओं की सिफ़ारिश नहीं करता। 10 से 19 साल के किशोरों में, जब निगरानी वाला जीवनशैली कार्यक्रम पर्याप्त असरदार न रहा हो, तब स्वीकृत दवाओं पर विचार किया जा सकता है। किशोरों के लिए कौन-सी दवाएँ स्वीकृत हैं, यह हर देश में अलग है।

क्या मुझे अपने बच्चे को डाइट पर रखना चाहिए?

नहीं, बच्चों के लिए सख़्त डाइट की सलाह नहीं दी जाती। बेहतर है कि पूरा परिवार मिलकर सेहतमंद बदलाव करे, जैसे तय समय पर खाना, मीठे पेय की जगह पानी, ज़्यादा खेल-कूद और पूरी नींद। कोई डाइटीशियन या व्यवस्थित कार्यक्रम इसमें मदद कर सकता है।

स्रोत

  1. WHO – Obesity and overweight fact sheet (2026) (अंग्रेज़ी में)
  2. PAHO/WHO – WHO issues first global guidelines on child and adolescent obesity (2026) (अंग्रेज़ी में)
  3. CDC – Child and teen BMI categories (अंग्रेज़ी में)
  4. Mayo Clinic – New pediatric obesity guidelines (अमेरिकन एकेडमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स की क्लिनिकल प्रैक्टिस गाइडलाइन का सार, 2023) (अंग्रेज़ी में)
  5. HSE Ireland – Talking to your child about weight (अंग्रेज़ी में)
  6. ScienceDaily – Weight-focused parent-teen conversations linked to unhealthy eating behaviors (Berge et al., JAMA Pediatrics, 2013) (अंग्रेज़ी में)

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