मोटापा होने का मतलब यह नहीं कि आपको ये बीमारियाँ होंगी ही। जोखिम कई बातों पर निर्भर है, जैसे जीन, शरीर की चर्बी कहाँ जमा है, उम्र और देखभाल तक पहुँच। आपके डॉक्टर आपका अपना जोखिम समझने में मदद कर सकते हैं।
मोटापा सेहत पर कैसे असर डालता है?
मोटापा सेहत पर दो मुख्य तरीक़ों से असर डालता है: चर्बी के ऊतक ऐसे हार्मोन और सूजन वाले संकेत छोड़ते हैं जो मेटाबॉलिज़्म बिगाड़ते हैं, और अतिरिक्त वज़न जोड़ों, साँस की नली और दिल पर शारीरिक दबाव डालता है। ग्लोबल बर्डन ऑफ़ डिज़ीज़ के ताज़ा अनुमानों के अनुसार, आदर्श से ऊँचा BMI दुनिया भर में हर साल लगभग 37 लाख मौतों का कारण बनता है, मुख्य रूप से दिल-नसों की बीमारी, डायबिटीज़ और कैंसर के ज़रिए।
दुनिया और भारत की तस्वीर के लिए देखें देशों में मोटापा दर और भारत में मोटापा। नीचे की तालिका एक झलक देती है, और आगे के हिस्से हर समूह की बीमारियों को समझाते हैं।
| शरीर का हिस्सा | बीमारियाँ |
|---|---|
| मेटाबॉलिज़्म | टाइप 2 डायबिटीज़, ऊँचे ट्राइग्लिसराइड, कम HDL कोलेस्ट्रॉल, गठिया (गाउट) |
| दिल और रक्त नलिकाएँ | हाई ब्लड प्रेशर, कोरोनरी हृदय रोग, हार्ट फ़ेल्योर, एट्रियल फ़िब्रिलेशन, स्ट्रोक, ख़ून के थक्के |
| लिवर और पाचन | फ़ैटी लिवर (MASLD), पित्त की पथरी, पैंक्रियाटाइटिस |
| साँस | ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया, अस्थमा |
| जोड़ | घुटनों, कूल्हों और टख़नों का ऑस्टियोआर्थराइटिस |
| हार्मोन और प्रजनन | कम प्रजनन क्षमता, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS), इरेक्शन की समस्याएँ, गर्भावस्था की जटिलताएँ |
| किडनी और मूत्राशय | क्रॉनिक किडनी रोग, पेशाब पर नियंत्रण न रहना |
| मानसिक सेहत | डिप्रेशन, एंग्ज़ायटी, कम आत्म-सम्मान, ईटिंग डिसऑर्डर |
| कैंसर | 13 तरह के कैंसर (नीचे देखें) |
मोटापा टाइप 2 डायबिटीज़ से कैसे जुड़ा है?
मोटापा टाइप 2 डायबिटीज़ का सबसे बड़ा जोखिम कारक है, क्योंकि अतिरिक्त चर्बी, ख़ासकर अंगों के आसपास की, शरीर को इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील बना देती है। अमेरिका में टाइप 2 डायबिटीज़ वाले लगभग 10 में से 9 लोगों का वज़न ज़्यादा है या उन्हें मोटापा है।
वज़न घटाने से डायबिटीज़ टल सकती है और कभी-कभी रिमिशन में जा सकती है। ज़्यादा जोखिम वाले लोगों में शरीर का 5 से 7 प्रतिशत वज़न घटाने से टाइप 2 डायबिटीज़ रोकी या टाली जा सकती है। DiRECT ट्रायल में, हाल में डायबिटीज़ पाए गए जिन लोगों ने व्यवस्थित कम-कैलोरी डाइट कार्यक्रम अपनाया, उनमें से लगभग आधे (46 प्रतिशत) एक साल बाद रिमिशन में थे; जिन्होंने 15 kg या ज़्यादा घटाया, उनमें 86 प्रतिशत।
ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी और स्ट्रोक का क्या?
मोटापा ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर बढ़ाता है, जो मिलकर रक्त नलिकाओं को नुक़सान पहुँचाते हैं और हार्ट अटैक व स्ट्रोक का जोखिम बढ़ाते हैं। यह दिल की बनावट भी बदलता है, जिससे हार्ट फ़ेल्योर और अनियमित धड़कन (एट्रियल फ़िब्रिलेशन) हो सकती है।
यह जोखिम घटाया जा सकता है। पैदल चलने जैसी नियमित शारीरिक सक्रियता, अच्छा खाना, धूम्रपान न करना और हाई ब्लड प्रेशर व कोलेस्ट्रॉल का इलाज, ये सब दिल और नसों की रक्षा करते हैं। आपके लिए कौन-से क़दम सबसे अहम हैं, यह डॉक्टर बता सकते हैं। देखें लाइफस्टाइल से इलाज।
कौन-से कैंसर मोटापे से जुड़े हैं?
WHO की संस्था इंटरनेशनल एजेंसी फ़ॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) का निष्कर्ष है कि अतिरिक्त चर्बी को 13 कैंसरों से जोड़ने के पर्याप्त सबूत हैं:
- भोजन नली (एडेनोकार्सिनोमा) और आमाशय का ऊपरी हिस्सा (गैस्ट्रिक कार्डिया)
- बड़ी आँत और मलाशय
- लिवर, पित्ताशय और अग्न्याशय
- स्तन (मेनोपॉज़ के बाद), गर्भाशय (एंडोमेट्रियम) और अंडाशय
- किडनी (रीनल सेल)
- थायरॉयड
- मेनिन्जियोमा (दिमाग़ का आम तौर पर बिनाइन ट्यूमर)
- मल्टिपल मायलोमा (ख़ून का एक कैंसर)
IARC ने कहा कि जानवरों और प्रणाली-स्तर के अध्ययन संकेत देते हैं कि इरादतन वज़न घटाने से कैंसर का जोखिम घट सकता है, पर इंसानों में इसकी पुष्टि अभी बाक़ी है। हर शारीरिक आकार पर नियमित कैंसर स्क्रीनिंग करवाते रहना ज़रूरी है।
MASLD (फ़ैटी लिवर) क्या है?
MASLD, यानी मेटाबॉलिक डिसफ़ंक्शन-एसोसिएटेड स्टिएटोटिक लिवर डिज़ीज़, लिवर में चर्बी का जमा होना है, जो मोटापे और टाइप 2 डायबिटीज़ जैसे मेटाबॉलिक जोखिम कारकों से जुड़ा है। पहले इसे NAFLD कहा जाता था, फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए नाम पर सहमति बनी।
कुछ लोगों में इसमें सूजन आ जाती है (MASH) और इससे निशान, सिरोसिस या लिवर कैंसर हो सकता है। आम तौर पर कोई लक्षण नहीं होते, इसलिए यह अक्सर ख़ून की जाँच या स्कैन से पकड़ा जाता है। शरीर का सिर्फ़ 3 से 5 प्रतिशत वज़न घटाने से भी लिवर की चर्बी घट सकती है, और ज़्यादा वज़न घटने से सूजन सुधर सकती है।
मोटापा नींद और जोड़ों पर कैसे असर डालता है?
गर्दन के आसपास का अतिरिक्त ऊतक नींद में साँस की नली को तंग कर सकता है, जिससे ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया होता है: साँस में रुकावटें, ज़ोरदार खर्राटे और दिन में थकान। इलाज न हो तो इससे हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी और डायबिटीज़ का जोखिम बढ़ता है। डॉक्टर को बताने लायक़ संकेत: सोकर भी तरोताज़ा न उठना, दिन में सो जाना, और साथी का साँस रुकते देखना।
मोटापा घुटनों, कूल्हों और टख़नों के ऑस्टियोआर्थराइटिस का भी प्रमुख जोखिम कारक है, जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव और सूजन के ज़रिए। शरीर का 5 से 10 प्रतिशत वज़न घटाने से दर्द घट सकता है और चलना व रोज़ का कामकाज बेहतर हो सकता है।
प्रजनन क्षमता, हार्मोन और किडनी का क्या?
मोटापा हर लिंग में हार्मोन बिगाड़ सकता है। महिलाओं में यह अनियमित पीरियड्स, ओव्यूलेशन की समस्याओं और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) से जुड़ा है, और प्रजनन इलाज का असर कम कर सकता है। पुरुषों में यह कम टेस्टोस्टेरोन और शुक्राणुओं की कम गुणवत्ता से जुड़ा है। शरीर का लगभग 5 प्रतिशत वज़न घटाने से नियमित चक्र, ओव्यूलेशन और गर्भधारण की संभावना बढ़ सकती है। देखें हमारा पेज प्रेगनेंसी में मोटापा।
मोटापा क्रॉनिक किडनी रोग का जोखिम बढ़ाता है, मुख्य रूप से डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर के ज़रिए, पर सीधे भी। इससे पेशाब पर नियंत्रण की समस्या भी हो सकती है, जो वज़न घटने से अक्सर सुधरती है।
मोटापा मानसिक सेहत पर कैसे असर डालता है?
मोटापा और मानसिक सेहत एक-दूसरे पर दोनों दिशाओं में असर डालते हैं। मोटापे के साथ जी रहे लोगों में डिप्रेशन, एंग्ज़ायटी, कम आत्म-सम्मान और ईटिंग डिसऑर्डर का जोखिम ज़्यादा है, और डिप्रेशन व कुछ मानसिक रोग की दवाएँ बदले में वज़न बढ़ा सकती हैं। स्कूल, काम या इलाज में वज़न को लेकर कलंक इस बोझ का बड़ा हिस्सा है। और पढ़ें: नींद, तनाव और मोटापा और मनोवैज्ञानिक सहायता।
शरीर का 5 से 15 प्रतिशत वज़न घटाने के क्या फ़ायदे हैं?
शरीर का 5 से 15 प्रतिशत वज़न घटाकर उसे बनाए रखने से मोटापे से जुड़ी कई बीमारियाँ सुधरती हैं, और ऊपरी सिरे पर फ़ायदे ज़्यादा होते हैं। 100 kg वज़न वाले व्यक्ति के लिए 5 प्रतिशत का मतलब 5 kg है।
| घटा वज़न | अध्ययनों में दिखे फ़ायदे |
|---|---|
| लगभग 3 से 5% | लिवर में कम चर्बी; कम ट्राइग्लिसराइड; बेहतर ब्लड शुगर; कुछ महिलाओं में बेहतर ओव्यूलेशन |
| 5 से 10% | कम ब्लड प्रेशर; टाइप 2 डायबिटीज़ का कम जोखिम; घुटनों में कम दर्द और बेहतर चलना-फिरना; पेशाब पर नियंत्रण की कम दिक़्क़त; बेहतर HDL कोलेस्ट्रॉल |
| 10 से 15% या ज़्यादा | स्लीप एपनिया में सुधार; लिवर की सूजन (MASH) में सुधार; टाइप 2 डायबिटीज़ रिमिशन की ज़्यादा संभावना; कुछ अध्ययनों में दिल-नसों की कम घटनाएँ |
बेहतर नींद, ज़्यादा हलचल और सेहतमंद खाने से भी सेहत को फ़ायदा मिलता है, चाहे तराज़ू पर कम बदलाव दिखे। बहुत तेज़ी से वज़न घटाने से पित्त की पथरी का जोखिम बढ़ सकता है, इसलिए यह पेशेवर साथ में करना बेहतर है। विकल्प हमारे पेज मोटापे का इलाज पर समझाए गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मोटापे से कितने कैंसर जुड़े हैं?
इंटरनेशनल एजेंसी फ़ॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) 13 ऐसे कैंसर गिनाती है जिनका अतिरिक्त चर्बी से संबंध पर्याप्त सबूतों से साबित है। इनमें आँत, गर्भाशय, स्तन (मेनोपॉज़ के बाद), किडनी, लिवर, अग्न्याशय और भोजन नली का कैंसर शामिल हैं। हर शारीरिक आकार पर नियमित स्क्रीनिंग ज़रूरी है।
सेहत सुधारने के लिए मुझे कितना वज़न घटाना होगा?
कई बीमारियाँ शरीर का 5 से 10 प्रतिशत वज़न टिकाऊ रूप से घटाने पर सुधरती हैं, जैसे ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और घुटनों का दर्द। कुछ, जैसे स्लीप एपनिया, लिवर की सूजन और टाइप 2 डायबिटीज़ का रिमिशन, के लिए आम तौर पर 10 से 15 प्रतिशत या ज़्यादा चाहिए। यथार्थवादी लक्ष्य तय करने में डॉक्टर मदद कर सकते हैं।
क्या वज़न घटाने से टाइप 2 डायबिटीज़ रिमिशन में जा सकती है?
हाँ, कुछ लोगों में। DiRECT ट्रायल में हाल ही में टाइप 2 डायबिटीज़ पाए गए 46 प्रतिशत लोग व्यवस्थित वज़न प्रबंधन कार्यक्रम के एक साल बाद रिमिशन में थे, और 15 kg या ज़्यादा घटाने वालों में 86 प्रतिशत। डायबिटीज़ की दवाएँ बदलने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें।
क्या सामान्य BMI पर भी मोटापे से जुड़ी बीमारियाँ हो सकती हैं?
हाँ। सेहतमंद दायरे वाले BMI के लोगों में भी अंगों के आसपास चर्बी हो सकती है, जो टाइप 2 डायबिटीज़, फ़ैटी लिवर और दिल की बीमारी का जोखिम बढ़ाती है। इसीलिए BMI के साथ कमर का माप और ख़ून की जाँच अहम हैं।
स्रोत
- GBD 2023 Disease and Injury and Risk Factor Collaborators – Burden of 375 diseases and injuries, risk-attributable burden of 88 risk factors, and healthy life expectancy, 1990–2023, The Lancet (2025)
- NIDDK (NIH) – Health risks of overweight and obesity (अंग्रेज़ी में)
- Lauby-Secretan B et al. (IARC Handbook Working Group) – Body fatness and cancer, New England Journal of Medicine (2016)
- Ryan DH, Yockey SR – Weight loss and improvement in comorbidity: differences at 5%, 10%, 15%, and over, Current Obesity Reports (2017)
- American College of Cardiology – SELECT trial summary: semaglutide and cardiovascular outcomes in obesity without diabetes (2023)
- Diabetes & Primary Care – DiRECT: low-calorie formula diet increases remission at 1 year
